Bazm-e-khayal दश्ते दिल* में खोए हुए खयालों को आज कहने को कोई *सुखनवर नहीं मिलता ये मशीनो का शहर है, यहां ढूंढे से दस्तकारों* को खरीदार अब नहीं मिलता * Forest of the heart, *Poet,* Handicraft workers क्यूं करूं हिज्र में गुजर यारों क्यूं मेरे मुल्क में रोजगार नहीं मिलता किसके हक में करूं ये बज्मे- खयाल ऐसी दौलत का कोई दावेदार नहीं मिलता यकीन ज़ुबां का करूं ,या आंख की मानूं एक इल्जाम है, मगर वाकया* नहीं मिलता * Vaqiya: sequence of events सुर्ख दिखता है सरे शाम उफक़* का पैरहन कौन कहता है जमीन से आसमान नहीं मिलता *Horizon लौट कर चल कि मां अकेली है बूढ़ी आंखों को तेरा रास्ता नहीं मिलता वो जो मिलते है गुज़रे बचपन में फेसबुक पर कोई दोस्त ,यार नहीं मिलता
आज ये गम है के कुछ भी नहीं हूँ मैं कल जहाँ पहुँचा था , अब तक वहीं हूँ मैं देखी है ज़माने कि तरक्की तो सच कहूँ अदना सही, मुतासिर कभी, हासिद नही हूँ मैं उनकी नवाज़िशें मुझे अच्छी नही लगती कल तक के जिन दिलों का सहारा रहा हूँ मैं सब अपने इरादों से डुबोई है कश्तियान वैसे किसी भंवर का मारा नही हूँ मैं मेरे पते के खत भी मिलेंगे यक़ीन से ख़ानाबदोश हूँ, मगर बेघर नही हूँ मैं कालिख मे सुर्ख़ियों के ढलने का चलन है अख़बार तो आता है , पढ़ता नही हूँ मैं कैसे बताऊं दोस्त के मेरी रज़ा क्या है मैं आशना हूँ लेकिन मेहरम नही हूँ मैं है हर नज़र मे नज़रिए की मिलावट जैसा तू जानता है,वैसा नही हूँ मैं